मुख्य-पृष्ट
वैवाहिक कार्यक्रम
वैवाहिक योजना
वैवाहिक आवश्यकता
वैवाहिक गीत
वैवाहिक स्रोत
वैवाहिक उपयोगी बातें
1. कुछ उपयोगी बातें
2. विवाह का पंजीकरण
3. जन्म- कुण्डली मिलान
4. सात वचनों की डोर
5. सोलह श्रृंगार
6. सात शत्रु
7. पत्रिका मिलान
8. एक ही गौत्र में विवाह?
9. विवाह संस्कार
10. विवाह संस्कार कर्म
11. विवाह योग के कारक
12. विवाह योग
13. विवाह का विज्ञान
14. विवाह के उपाय
15. सप्तपदी
16. कन्यादान - शिक्षा एवं प्रेरणा
17. कन्यादान क्या, क्यों और किसे?
वैवाहिक हंसिकाएं
वैवाहिक डाऊनलोड
वैवाहिक समाचार
वैवाहिक रोचक रीति-रिवाज
वैवाहिक शब्दकोश
अन्य उपयोगी बातें
हमारी सेवाऐं
हमारे बारें में

जरूरी है विवाह का पंजीकरण

अगर विवाह होने जा रहा है तो आज के दौर में यह बेहद जरूरी है कि वैवाहिक सम्बन्ध को वैधानिक रूप दे सकें. इसके लिए पहले से सचेत रहना सुरक्षित और समझदारी भरा कदम होगा. आपको जानना चाहिए कि वैवाहिक सम्बन्धों को वैधानिक दर्जा दिलाने के लिए क्या-क्या जरूरी है.

पंजीकरण की प्रक्रिया : विवाह के पंजीकरण की दो स्थितियां होती है. पहली यह है कि विवाह पहले तथा बाद में पंजीकरण के लिए आवेदन करें. दूसरी यह है कि पंजीकरण के लिए आवेदन पहले करें और विवाह बाद में करें पहली स्थिति में आप विवाह के बाद पंजीकरण कार्यालय में विवाह के पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं. इसके लिए अदालत को पहले से सूचना देने की कोई जरुरत नहीं होती . जबकि दूसरी स्थिति में आपको अदालत में कम से कम एक माह पूर्व आवेदन देना जरुरी होता है. आवेदन मिलने के बाद अदालत इस आशय की सूचना लगाती है की यदि इस युगल के विवाह के सम्बन्ध में किसी को कोई आपत्ति हो तो वह तीस दिन के अन्दर सूचित करें. कोई आपत्ति आने से पंजीकरण प्रक्रिया रुक जाती है परन्तु आपत्ति नहीं आई तो फिर आवश्यक दस्तावेजों के निरीक्षण के बाद विवाह का पंजीकरण कर प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता है .

आवश्यक दस्तावेज : अगर एक माह पहले आवेदन देकर बाद में विवाह करना हो तो केवल तीन बातों के सन्दर्भ में दस्तावेज की जरुरत होती है. पहला आयु प्रमाण-पत्र, दूसरा अधिवास प्रमाण-पत्र और तीसरा युगल के पासपोर्ट आकार के दो फोटो. ये तीनों चीजें विवाह के इच्छुक पुरुष और स्त्री दोनों को देने होते हैं. विवाह के लिए पुरुष की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और स्त्री की न्यूनतम आयु 18 वर्ष निश्चित हैं. दोनों का अविवाहित या / विधुर व विधवा या तलाकशुदा होना चाहिये. साथ ही उनके बीच कोई ऐसा रिश्ता कहीं होना चाहिए जो विवाह के लिए प्रतिबन्धित हो.

गवाह और वकील : विवाह का पंजीकरण कराने के लिए किसी वकील की सेवाएं लेने की कोई अनिवार्यता नहीं होती. वैधानिक रुप से इसमें ऐसी कोई बात नहीं होती. यह आपकी इच्छा और सुविधा पर निर्भर है.परन्तु गवाह आपको हर हाल में ले जाने होंगे. यदि आप एक माह पहले से आवेदन देकर बाद में विवाह करना चाहते हैं तो आपको केवल दो गवाह ले जाने होंगे. क्रमश: वर और वधू दोनों पक्षों से एक-एक गवाह की जरुरत होती है.विशेष स्थितियों में ऐसा भी सम्भव है कि एक ही व्यक्ति जो दोनो पक्षों को जानता हो, दोनो के लिए गवाही दे सकता है. लेकिन अगर आप पहले से विवाह कर चुके हैं. और बाद में पंजीकरण के लिए आवेदन करते हैं तो फिर एक राजपत्रित अधिकारी को बतौर गवाह पेश होना होगा. उसे इस आशय का बयान देना होगा कि वह दोनो को जानता है. जब विवाह हुआ तब वह विवाह स्थल पर मौजूद था और उसने विवाह होते हुए देखा. साथ ही आपको अपने धर्म के अनुसार पण्डित, काजी या पादरी की ओर से विवाह का प्रमाण-पत्र देना होगा . आप विवाह के निमंत्रण-पत्र अथवा फोटो भी दिखा सकते हैं.

उपनाम और धार्मिक कानून : किसी भी स्त्री के लिए विवाह के बाद अपने नाम के साथ पति का उप नाम लगाने की कोई अनिवार्यता नहीं हैं. यदि दो भिन्न सम्प्रदायों के स्त्री-पुरुष आपस में विवाह करते हैं तो अन्य शर्तें व औपचारिकताएं पूरी होने के पर उनके विवाह का पंजीकरण विशेष विवाह अधिनियम के अन्तरगत कराया जा सकता है. समान धर्म या जाति के युगल के विवाह का पंजीकरण इसी अधिनियम के अन्तर्गत होता है.और पंजीकरण के बाद ही दोनों पति-पत्नी के रुप में एकसाथ रहने के अधिकृत हो जाते हैं. परन्तू यदि आप सम्प्रदाय विशेष के कानून के अन्तर्गत विवाह करना चाहते हैं तो फिर आपको सम्बन्धित धर्म के अनुसार पहले या बाद में धर्म सम्मत परम्परागत वैवाहिक औपचारिकता भी पूरी करनीहोगी.

जरुरत पंजीकरण की : विवाह के बाद पति या पत्नी के रुप में आपके वैधानिक अधिकारों की उपलब्धि सुनिश्चित कराने के लिए विवाह का पंजीकरण जरुरी है. विवाह के वैधानिक रुप से पंजीकृत रहने पर आपके अधिकार सुरक्षित रहते हैं. साथ ही यह आपके साथी को किसी तरह का गैर जिम्मेदाराना व्यवहार करने से भी रोकता है. इसके अलावा ऐसी स्थिति में जबकि दोनों में से एक की असमय मृत्यु हो जाए या कोई और दुर्घटना घट जाए तो यह सम्पति सम्बन्धी विवादों में अधिकारों की सुरक्षा के लिए भी मददगार होता है. बीमा राशि, भविष्य निधि राशि, सोसाइटी या कल्ब की सदस्यता, शेयरों और अन्य वित्तिय मामलों में भी इससे मदद मिल सकती है.

| विवाह सम्बन्धित कुछ उपयोगी बातें | जरूरी है विवाह का पंजीकरण | जन्म- कुण्डली मिलान क्यों ? | सात वचनों से बंधी है डोर | नववधू का सोलह श्रृंगार | सात शत्रु | पत्रिका मिलान आवश्यक नहीं | क्यों नहीं करना चाहिए एक ही गौत्र में विवाह? | महत्त्वपूर्ण है विवाह संस्कार | विवाह संस्कार कर्म | विवाह योग के कारक | विवाह योग | सुखी विवाह का विज्ञान | विवाह के उपाय | सप्तपदी | कन्यादान - शिक्षा एवं प्रेरणा | कन्यादान क्या, क्यों और किसे? |

Find US on

This Website is Developed by Saajan Verma "Sanjay"
© 2013-2014 www.SagaaiSeVidaaiTak.in. All Right Reserved.
Powered By :