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पत्रिका मिलान आवश्यक नहीं

सुखमय दाम्पत्य जीवन के लिए मेलापक की अनिवार्यता पर ज्योतिष शास्त्र के सभी आचार्यों ने जोर दिया है, परन्तु कुछ ऐसी भी परिस्थितियां होती हैं, जहां मेलापक मिलाने की कोई आवश्यकता नहीं होती. इन्हें मेलापक का अपवाद कहा जा सकता है. निम्नलिखित परिस्थितियों में मेलापक का विचार नहीं करना चाहिए, ये परिस्थितियां हैं-

जब किसी कन्या के विवाह के साथ कोई शर्त जुड़ी हो तो विवाह से पूर्व मेलापक की आवश्यकता नहीं होती, जैसे कन्या के विवाह के लिए वर का चुनाव करते समय यह शर्त लगा दी जाए कि जो व्यक्ति मत्स्यबेध, चक्रबेध या धनुषभंग करेगा, उसके साथ कन्या का विवाह कर दिया जाएगा. इस स्थिति में मेलापक का विचार नहीं करना चाहिए.

युद्ध में प्राप्त या अपहृत कन्या के साथ मेलापक मिलाने की आवश्यकता नहीं होती.
कन्या के पिता के द्वारा स्वेच्छा से, प्रेमपूर्वक या उपहार में दी गई कन्या के साथ विवाह करने के लिए मेलापक विचारने की आवश्यकता नहीं होती.

यदि कन्या स्वयं किसी पुरुष का वरण कर ले तो उसके साथ विवाह करने के लिए मेलापक का विचार करना अनिवार्य नहीं होता. इस स्थिति में प्रस्ताव स्वयं कन्या की ओर से होना चाहिए.

पुनर्विवाह में भी मेलापक का विचार करना अनिवार्य नहीं होता. पुनर्विवाह में मेलापक का विचार ऐच्छिक माना गया है.
50 वर्ष या अधिक आयु के पुरुष तथा 45 या अधिक आयु की स्त्री का विवाह करते समय भी मेलापक मिलाना अनिवार्य नहीं है.

महर्षि याज्ञवल्क्य के अनुसार यह छूट परिस्थिगत अपरिहार्यता को ध्यान में रखकर दी गई, ताकि लोग इन विषमताओं में भी सार्वजनिक तौर पर दाम्पत्य सूत्र में बंध सकें. गृह मेलापक का विचार करते समय वर एवं वधू की दशा-महादशा के क्रम में पूरकत्व भाव का ध्यान रखना चाहिए. विशेषकर भाग्य, प्रगति, धन प्राप्ति एवं अनिष्ट योग कारक गृहों की दशान्तरदशाओं को ध्यानपूर्वक देख लेना चाहिए.

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