मुख्य-पृष्ट
वैवाहिक कार्यक्रम
वैवाहिक योजना
वैवाहिक आवश्यकता
वैवाहिक गीत
वैवाहिक स्रोत
वैवाहिक उपयोगी बातें
वैवाहिक हंसिकाएं
वैवाहिक डाऊनलोड
वैवाहिक समाचार
वैवाहिक रोचक रीति-रिवाज
वैवाहिक शब्दकोश
अन्य उपयोगी बातें
हमारी सेवाऐं
हमारे बारें में

हल्दहाथ (हरिद्रारोपन)

इसे हल्दी या पीले हाथ भी कहते हैं . इस अवसर पर श्रीगणेश तथा कुंकुम-पत्रिका की पूजा की जाती है. थैली में स्वास्तिक माण्ड कर पूजा की जाती है. मांगलिक गीत गाये जाते हैं. यह रस्म दोनों पक्षों के यहां की जाती है. हल्दहाथ के पश्चात वर-कन्या को पिठ्ठी लगाई जाती है.

व्यवस्था :

पूजा की थाली
पान, सुपारी, रोली, मोली, चावल, फल, दुर्व्वा
घण्टी, रुपया, पैसा आदि
ऊखल-मुसल (काठका)-2
लौहे की कुडछी-2
छाजला-2
हल्दी की गांठ
साबुत नमक
जौ
हंसली-मुंधडी़ चान्दी की
पीढा़
मूंग दाल पीसी हुई (मंगोडी़ का के लिए)
ताला-चाबी सहित
पिरोत- एक छन्नी में मूंग- चावल-पैसा
धी-पाना (धी-बताशा)

नोट -

हल्दात के पश्चात् बहन-बेटियों से आरता करवा कर नेग दिया जाता है. एवं मिश्राणियों को हल्दात का नेग देते हैं.
बिबाह दिन से पूर्व तृतीय षष्ठी और नवम दिन को त्याग कर विवाह नक्षत्र में अथवा शुभ-दिन में अपने-अपने घरों में कन्या-वर के तैल हरिद्रारोपन (हल्दहाथ) करावें.

Find US on

This Website is Developed by Saajan Verma "Sanjay"
© 2013-2014 www.SagaaiSeVidaaiTak.in. All Right Reserved.
Powered By :